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𝟕.हवसी दरिंदा!

हालांकि ठाकुर हवेली में मातम का माहौल था।

लेकिन मैत्री के बर्ताव के बाद मातम मनाने का भी अब कोई फ़ायदा नहीं था। बड़की अम्मा सबका लटका हुआ मुंह देख कर माया भाभी से कहती हैं, "ऐ माया बहुरिया! जाके तनी छोटकी दुल्हिन को देखी आओ। और इ भी जवन तमासा होना था उ हो चूका। पहिले ही हमारे छोटके ठाकुर का ब्याह उ हँसी ख़ुशी से नहीं हुआ जइसे होना चाहिएं था। लेकिन अब आगे का रस्म अधूरा नहीं छूटेगा।" 

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I write of hearts that burn brightest in the dark.