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𝟏𝟕.पागलपन!

चंचल यति को लेकर बड़ी हवेली से मंदिर के लिए निकलती हैं।

उसके जाते ही मीना जी कहती हैं, "बड़की ठकुराइन कोनो नज़र ओजर लगा हैं का इ चंचलिया को? कल तक तो कोनो से सीधा मुंहे बात नहीं कि और अभी देखो थोड़ा। केतना खुश हैं।"

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