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𝟏𝟗.नाराज़गी में भी परवाह!

सुबह से शाम और शाम से अब रात हो चूकि थीं। लेकिन यति अपने कमरे से निकल कर बाहर नहीं आई थीं। और ना ही आदर्श के डर से कोई ऊपर यति के पास आया था। यहां तक कि रेखा जी भी नहीं...

आदर्श भी जब से बाहर गया था। तब से वापस लौटा नहीं था।

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I write of hearts that burn brightest in the dark.