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𝟐𝟕."छोटे ठाकुर उठिए! Aahh..."

रात के वक़्त...

आदर्श ज़ख्मी हालत में ख़ुद को संभालता हुआ हवेली पहुंचा। आदर्श के माथे के किनारों और बाजुओं से खून बह रहा था। उसने अपने बाजू को कस कर दूसरे हाथ से दबाया हुआ था। आदर्श जैसे तैसे सीढ़ियों पर आकर बैठ जाता हैं। इस वक़्त उसकी हालत काफ़ी ज़्यादा खराब थीं। उसे हॉस्पिटल जाने की जरूरत थीं लेकिन वो हॉस्पिटल जाने के बजाए अपने कमरे की ओर जाना चाहता था।

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softscribbles

I write of hearts that burn brightest in the dark.