
यति आदर्श के पास खड़ी थीं। वो बिना पलकें झपकाएं सुजी हुई लाल आंसुओं से डबडबाई आंखों से एक टक आदर्श के ज़ख्मों से रिस कर लाल करतें पट्टी को देख रही थीं।
उसकी आंखों में आँसू जैसे रूकने का नाम नहीं ले रहें थें। यति खुद के आंसुओं को अपने हाथ में थामती हैं। अपने आंसुओं को देख जाने क्यूं वो ख़ुद हैरान होती हैं। वो बार अपनी नज़रों को आदर्श पर करती हैं।


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