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𝟐𝟗."वैसे भी हमको मारना ही तो चाहती थीं तुम?"

Hospital!

    डॉक्टर आदर्श का Check Up कर रहें थें। असल में उसे अब तक होश नहीं आया था और वहीं मिथिलेश ठाकुर के तन बदन में जैसे आग सी लग चुकीं थीं। उन्हें अब तक आदर्श पर हमला करने वाले का कोई सबूत नहीं मिल पाया था। ऐसा पहली बार था जो किसी ने उनके सामने से आकर खंजर घोपा था और मिथिलेश ठाकुर बस हाथ पर हाथ धर कर बैठे हुए थें।

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I write of hearts that burn brightest in the dark.